दिल्ली में कांग्रेस को 24 अकबर रोड स्थित मुख्यालय पर फिलहाल अस्थायी राहत मिल गई है. बीजेपी से बातचीत के बाद कुछ महीनों का समय दिया गया है, लेकिन भविष्य अब भी अनिश्चित है. पार्टी बंगले को बचाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के नाम पर अलॉटमेंट का विकल्प तलाश रही है.

कांग्रेस को दिल्ली स्थित अपने ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड बंगाले को लेकर फिलहाल राहत मिल गई है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी को कुछ महीनों के लिए इस परिसर में बने रहने की अनुमति मिल गई है. हालांकि यह राहत अस्थायी है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.

सूत्रों के मुताबिक, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के साथ हुई अनौपचारिक चर्चा के बाद कांग्रेस को अगले कुछ महीनों के लिए इस बंगले में बने रहने का ‘एक्सटेंशन’ मिल गया है. हालांकि इसको लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन इसे टाइम-बाइंग अरेंजमेंट बताया जा रहा है.

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस 24 अकबर रोड को बनाए रखने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रही है. पार्टी की योजना है कि इस बंगले को किसी वरिष्ठ नेता के नाम पर आवंटित कराया जाए. नियमों के तहत स्पेशल कैटेगरी में पूर्व मुख्यमंत्री या पूर्व केंद्रीय मंत्री को ऐसे सरकारी आवास दिए जा सकते हैं. इस संदर्भ में अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे नेताओं के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं.

हालांकि 24 अकबर रोड को लेकर राहत मिली है, लेकिन पार्टी के अन्य दफ्तरों पर खतरा बना हुआ है. खासकर 5 रायसीना रोड स्थित कार्यालय, जहां यूथ कांग्रेस और NSUI के दफ्तर हैं, वहां से बेदखली की आशंका जताई जा रही है.

इन सबके बीच कांग्रेस को एक बड़ी कानूनी राहत भी मिली है. सुप्री कोर्ट के एक फैसले में पार्टी को 1970 के दशक में हुए विभाजन से जुड़ी कई संपत्तियों पर पहला दावा माना गया है. पार्टी नेताओं का मानना है कि इस फैसले का असर जंतर-मंतर स्थित पुराने मुख्यालय पर भी पड़ सकता है. कोर्ट के आदेश के आधार पर पार्टी कर्नाटक समेत कई जगहों पर अपनी संपत्तियों का कब्जा वापस लेने की तैयारी कर रही है.

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अब अपने कुछ संगठनों को जंतर-मंतर परिसर में शिफ्ट करने की योजना बना रही है. अगर ऐसा होता है, तो अन्य दफ्तरों के खोने का असर कुछ हद तक कम हो सकता है.

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