कविता शर्मा की दुग्ध इकाई बनी 100 से अधिक महिलाओं के लिए बाजार, सालाना कारोबार 70 लाख रुपये तक


रियल न्यूज इंडिया टुडे
शिमला। छौहारा विकास खंड के थाना-जांगला क्षेत्र की कविता शर्मा ने साबित कर दिखाया है कि हौसले और सही अवसर के साथ गांव से भी बड़े उद्यम की शुरुआत की जा सकती है। अक्टूबर 2025 में महज 20 लीटर दूध प्रतिदिन के प्रसंस्करण से शुरू हुई उनकी दुग्ध प्रसंस्करण इकाई अब करीब 800 लीटर प्रतिदिन दूध का प्रसंस्करण कर रही है। वर्तमान में इकाई में घी, पनीर, दही और मक्खन तैयार किए जा रहे हैं और अनुमानित वार्षिक कारोबार करीब 70 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

कविता की उद्यमिता की कहानी वर्ष 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद आगे बढ़ी। सरस मेले, दिल्ली हाट, अंतरराष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल और स्थानीय मेलों में उत्पादों के स्टॉल लगाने से उन्हें ग्राहकों की पसंद, बाजार की मांग और उत्पादों की प्रस्तुति को समझने का अवसर मिला। यहीं से अपना व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास पैदा हुआ।

पीएमएफएमई योजना बनी विस्तार का आधार

दुग्ध प्रसंस्करण इकाई शुरू करने के बाद आधुनिक मशीनरी और उपकरणों के लिए वित्तीय संसाधन सबसे बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) के तहत मिली 7 लाख रुपये की सहायता ने इस चुनौती को काफी हद तक आसान किया। इससे इकाई में बीएमसी, बैच पाश्चराइजर, होमोजेनाइजर, कल्चर टैंक, क्रीम सेपरेटर, फिलिंग मशीन और वैक्यूम पैकेजिंग मशीन सहित आवश्यक उपकरण स्थापित किए गए।

कविता ने उत्पाद तैयार करने के साथ बाजार बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया। उन्होंने खुद दुकान-दुकान जाकर उत्पादों की जानकारी दी और ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर गुणवत्ता व पैकेजिंग में सुधार किया। आज उनके उत्पाद रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल सहित आसपास के बाजारों में पहुंच रहे हैं।

इस उद्यम का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव स्थानीय महिलाओं को मिला है। 100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादक नियमित रूप से इकाई को दूध उपलब्ध करवाती हैं, जिसके एवज में करीब 7 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा दो स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।

कविता शर्मा का कहना है कि सरकार, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और PMFME के सहयोग से उन्हें अपने सपने को साकार करने का अवसर मिला। उनका लक्ष्य आने वाले समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर बाजार की बढ़ती मांग को पूरा करना है।

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