नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी के बाद काठमांडू में भारी बवाल हो गया है. सड़कों पर उतरे ओली समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. यह कार्रवाई बालेन शाह सरकार द्वारा छात्रों की मौत के मामले में की गई है. फिलहाल पूरे इलाके में तनाव है.

नेपाल की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है. पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के विरोध में आज राजधानी काठमांडू की सड़कों पर दिन भर जमकर हंगामा और प्रदर्शन हुआ. काठमांडू के बबरमहल इलाके में स्थिति उस वक्त बेकाबू हो गई जब पुलिस और ओली के समर्थकों के बीच सीधी भिड़ंत हो गई.

प्रदर्शनकारी माइतीघर से नया बानेश्वर की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बबरमहल स्थित जिला अदालत के पास ही रोकने की कोशिश की. देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस को जमकर लाठीचार्ज करना पड़ा. सिंहदरबार के ठीक सामने हुई इस झड़प की वजह से पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है और काठमांडू के कई हिस्सों में अभी भी स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है.

क्यों हुई ओली की गिरफ्तारी?

आपको बता दें कि यह पूरी कार्रवाई जेन-जी (Gen-Z) प्रदर्शनों के दौरान हुई छात्रों की मौत के मामले में की गई है. इस मामले में न केवल पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, बल्कि पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया गया है. इन दोनों ही बड़े नेताओं को छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.

दरअसल, बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया था. सरकार ने जांच आयोग की उस रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का आदेश दिया, जिसमें ओली और रमेश लेखक की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे. इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने इन दोनों नेताओं को हिरासत में लिया है. फिलहाल, ओली के कार्यकर्ता अपने नेता की रिहाई की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और नेपाल सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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